दशा माता की आरती – Dasha Mata Ki Aarti

दशा माता की आरती करना बहुत ही फलदायी माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में कहते हैं कि जीवन की परिस्थितियाँ उसक व्यक्ति की दशाओं पर ही निर्भर करती है। चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को महिलाएँ दशा माता का व्रत करती हैं। दशा माता का पूजन और उसके उपरान्त दशा माता की आरती (Dasha Mata Ki Aarti) का गायन प्रत्येक महिला को करना चाहिए। साथ ही इस दिन दशा माता की कथा पढ़ने का भी विधान है। माँ के प्रसन्न होने पर घर में सुख-समृद्धि आती है और मंगलमय वातावरण का निर्माण होता है। पढ़ें दशा माता की आरती–

आरती श्री दशा माता की।
जय सत-चित्त आनंद दाता की।
भय भंजनि अरु दशा सुधारिणी।
पाप -ताप-कलि कलुष विदारणी।
शुभ्र लोक में सदा विहारणी।
जय पालिनी दिन जनन की।
आरती श्री दशा माता की॥

अखिल विश्व- आनंद विधायिनी।
मंगलमयी सुमंगल दायिनी।
जय पावन प्रेम प्रदायिनी।
अमिय-राग-रस रंगरली की।
आरती श्री दशा माता की॥

नित्यानंद भयो आह्लादिनी।
आनंद घन आनंद प्रसाधिनी।
रसमयि रसमय मन- उन्मादिनी।
सरस कमलिनी विष्णुआली की।
आरती श्री दशा माता की॥

विदेशों में बसे कुछ हिंदू स्वजनों के आग्रह पर दशा माता की आरती (Dasha Mata Ki Aarti) को हम रोमन में भी प्रस्तुत कर रहे हैं। हमें आशा है कि वे इससे अवश्य लाभान्वित होंगे। पढ़ें दशा माता की आरती रोमन में–

āratī śrī daśā mātā kī।
jaya sata-citta ānaṃda dātā kī।
bhaya bhaṃjani aru daśā sudhāriṇī।
pāpa -tāpa-kali kaluṣa vidāraṇī।
śubhra loka meṃ sadā vihāraṇī।
jaya pālinī dina janana kī।
āratī śrī daśā mātā kī॥

akhila viśva- ānaṃda vidhāyinī।
maṃgalamayī sumaṃgala dāyinī।
jaya pāvana prema pradāyinī।
amiya-rāga-rasa raṃgaralī kī।
āratī śrī daśā mātā kī॥

nityānaṃda bhayo āhlādinī।
ānaṃda ghana ānaṃda prasādhinī।
rasamayi rasamaya mana- unmādinī।
sarasa kamalinī viṣṇuālī kī।
āratī śrī daśā mātā kī॥

सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

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