पुरुषोत्तम देव की आरती – Purushottam Dev Ki Aarti

पुरुषोत्तम देव की आरती दैवीय शक्ति का स्रोत है। जो भी इसे गाता है उसे जगत में हर इच्छित वस्तु शीघ्रातिशीघ्र प्राप्त हो जाती है। कहते हैं कि जो भी उनका पूजन करके पुरुषोत्तम देव की आरती (Purushottam Dev Ki Aarti) का गायन नित्य-प्रति करता है, वह सरलता से इस भवसागर से पार हो जाता है। इसे पढ़ने से मलिन चित्त सहज ही शुद्धि को प्राप्त होता है और जीवन का प्रत्येक आयाम प्रकाशित हो उठता है। इसका प्रत्येक अक्षर संजीवनी के समान है जिसके प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता है–आवश्यकता है तो निर्मल अन्तःकरण से इसका पाठ करने की। पढ़ें पुरुषोत्तम देव की आरती– 

जय पुरुषोत्तम देवा, स्वामी जय पुरुषोत्तम देवा।
महिमा अमित तुम्हारी, सुर-मुनि करें सेवा॥
जय पुरुषोत्तम देवा॥

सब मासों में उत्तम, तुमको बतलाया।
कृपा हुई जब हरि की, कृष्ण रूप पाया॥
जय पुरुषोत्तम देवा॥

पूजा तुमको जिसने सर्व सुक्ख दीना।
निर्मल करके काया, पाप छार कीना॥
जय पुरुषोत्तम देवा॥

मेधावी मुनि कन्या, महिमा जब जानी।
द्रोपदि नाम सती से, जग ने सन्मानी॥
जय पुरुषोत्तम देवा॥

विप्र सुदेव सेवा कर, मृत सुत पुनि पाया।
धाम हरि का पाया, यश जग में छाया॥
जय पुरुषोत्तम देवा॥

नृप दृढ़धन्वा पर जब, तुमने कृपा करी।
व्रतविधि नियम और पूजा, कीनी भक्ति भरी॥
जय पुरुषोत्तम देवा॥

शूद्र मणीग्रिव पापी, दीपदान किया।
निर्मल बुद्धि तुम करके, हरि धाम दिया॥
जय पुरुषोत्तम देवा॥

पुरुषोत्तम व्रत-पूजा हित चित से करते।
प्रभुदास भव नद से सहजही वे तरते॥
जय पुरुषोत्तम देवा॥

विदेशों में बसे कुछ हिंदू स्वजनों के आग्रह पर पुरुषोत्तम देव की आरती (Purushottam Dev Ki Aarti) को हम रोमन में भी प्रस्तुत कर रहे हैं। हमें आशा है कि वे इससे अवश्य लाभान्वित होंगे। पढ़ें पुरुषोत्तम देव की आरती रोमन में–

jaya puruṣottama devā, svāmī jaya puruṣottama devā।
mahimā amita tumhārī, sura-muni kareṃ sevā॥
jaya puruṣottama devā॥

saba māsoṃ meṃ uttama, tumako batalāyā।
kṛpā huī jaba hari kī, kṛṣṇa rūpa pāyā॥
jaya puruṣottama devā॥

pūjā tumako jisane sarva sukkha dīnā।
nirmala karake kāyā, pāpa chāra kīnā॥
jaya puruṣottama devā॥

medhāvī muni kanyā, mahimā jaba jānī।
dropadi nāma satī se, jaga ne sanmānī॥
jaya puruṣottama devā॥

vipra sudeva sevā kara, mṛta suta puni pāyā।
dhāma hari kā pāyā, yaśa jaga meṃ chāyā॥
jaya puruṣottama devā॥

nṛpa dṛढ़dhanvā para jaba, tumane kṛpā karī।
vratavidhi niyama aura pūjā, kīnī bhakti bharī॥
jaya puruṣottama devā॥

śūdra maṇīgriva pāpī, dīpadāna kiyā।
nirmala buddhi tuma karake, hari dhāma diyā॥
jaya puruṣottama devā॥

puruṣottama vrata-pūjā hita cita se karate।
prabhudāsa bhava nada se sahajahī ve tarate॥
jaya puruṣottama devā॥

सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

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