शाकंभरी माता की आरती – Shakambari Mata Ki Aarti

शाकंभरी माता की आरती हृदय के ताप का हरण करती है और भक्तों के हृदय पर प्रेम की वर्षा करने वाली है। जो भक्त शाकंभरी माता की आरती (Shakambari Mata Ki Aarti) पूरी श्रद्धा से गाता है, उसकी पूजा में हुई त्रुटियों का परिहार स्वतः ही हो जाता है। माँ तो भक्त-वत्सला हैं, करुणामयी हैं और दयालु हैं। वे वह सब देती हैं जो भी उनसे मांगा जाता है, बस आवश्यक है तो शुद्ध चित्त। दुर्गमासुर का वध करने वाली माता भक्त ही हर विपत्ति का भी नाश कर देती हैं। आइए, माँ को हृदय में स्थापित करें और उनकी परमपावनी आरती गाएँ–

हरि ऊँ शाकम्भर अम्बा जी की आरती कीजो।

ऐसो अद्भुत रूप हृदय धर लीजो
शताक्षी दयालु की आरती कीजो।

तुम परिपूर्ण आदि भवानी माँ,
सब घट तुम आप बखानी माँ

शाकम्भरी अम्बा जी की आरती कीजे।

तुम्हीं हो शाकम्भरी,
तुम ही हो शताक्षी माँ

शिव मूर्ति माया, तुम ही हो
प्रकाशी माँ, श्री शाकम्भर…..

नित जो नर नारी
अम्बे आरती गावे माँ

इच्छा पूरन कीजो शाकम्भरी
दर्शन पावे माँ, श्री शाकम्भर…..

जो नर आरती पढ़े पढ़ावे माँ
जो नर आरती सुने सुनावे माँ

बसे बैकुण्ड शाकम्भर
दर्शन पावे श्री शाकम्भर…..

जिस तरह माँ काली आदिशक्ति का रौद्र रूप हैं, उसी तरह शाकंभरी माता उनका सौम्य रूप हैं। वे शीघ्र ही प्रसन्न होने वाली हैं। हृदय से गाएँ यह आरती और पाएँ माता की कृपा।

सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

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