राजयोग षष्ठ अध्याय – प्रत्याहार और धारणा

स्वामी विवेकानंद राजयोग पुस्तक के छठे अध्याय में प्रत्याहार और धारणा की व्याख्या और व्यावहारिक उपयोग समझा रहे हैं।

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राजयोग पंचम अध्याय – अध्यात्म प्राण का संयम

जानें स्वामी विवेकानंद कृत राजयोग के पाँचवें अध्याय द्वारा श्वास-प्रश्वास तथा प्राणायाम से कैसे जागृत करें कुंडलिनी।

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राजयोग चतुर्थ अध्याय – प्राण का आध्यात्मिक रूप

स्वामी विवेकानंद की पुस्तक राजयोग के चौथे अध्याय में पढ़ें कैसे प्राण कुंडलिनी शक्ति के द्वारा शरीर में क्रियाशील होता है।

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राजयोग तृतीय अध्याय – प्राण

राजयोग के तीसरे अध्याय में स्वामी विवेकानंद समझा रहे हैं कि प्राण वस्तुतः है क्या, इसे कैसे वश में लाया जा सकता है और उसके क्या लाभ हैं। साथ प्राणायाम क्यों और किस तरह किया जाए।

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