शालिग्राम जी की आरती – Shaligram Ji Ki Aarti

शालिग्राम जी की आरती का पाठ प्रतिदिन शालिग्राम-उपासना के बाद विधिपूर्वक किया जाता है। मान्यता है कि शालिग्राम जी की आरती अन्त में गाने से भगवान श्री विष्णु के पूजन में रह गई कोई भी कमी दूर हो जाती है और भक्तवत्सल श्रीहरि की कृपाधारा से भक्त आलोढ़ित हो जाता है। शालिग्राम को साक्षात भगवान् श्री कृष्ण का स्वरूप माना गया है। नित्य ही शालिग्राम स्तोत्र का पाठ करने और शालिग्राम जी की आरती (Shaligram Ji Ki Aarti) गाने से ब्रह्महत्या-पर्यन्त सभी पाप मिट जाते हैं। जो भक्त श्रद्धापूर्वक तुलसीदल के साथ शालिग्राम का पूजन करता है भगवान उससे अवश्य ही प्रसन्न होते हैं।

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शालीग्राम सुनो विनती    मेरी।
यह वरदान दयाकर पाऊं॥ 

प्रातः समय उठी मंजन करके।
प्रेम सहित स्नान कराऊं॥ 

चन्दन धूप दीप तुलसीदल।
वरण – वरण के पुष्प चढ़ाऊं॥

तुम्हरे सामने नृत्य करूं नित।
प्रभु घण्टा शंख मृदंग बजाऊं॥

चरण धोय चरणामृत लेकर।
कुटुम्ब सहित बैकुण्ठ सिधारूं॥

जो  कुछ  रूखा – सूखा  घर  में।
भोग लगाकर भोजन पाऊं॥

मन बचन कर्म से पाप किये।
जो परिक्रमा के साथ बहाऊं॥

ऐसी कृपा करो मुझ पर।
जम के द्वारे जाने न पाऊं॥

माधोदास की विनती यही है।
हरि दासन को दास कहाऊं॥

विदेशों में बसे कुछ हिंदू स्वजनों के आग्रह पर इस आरती को हम रोमन में भी प्रस्तुत कर रहे हैं। हमें आशा है कि वे इससे अवश्य लाभान्वित होंगे। पढ़ें यह आरती रोमन में–

Read Shaligram Ji Ki Aarti

śālīgrāma suno vinatī merī।
yaha varadāna dayākara pāūṃ॥

prātaḥ samaya uṭhī maṃjana karake।
prema sahita snāna karāūṃ॥

candana dhūpa dīpa tulasīdala।
varaṇa – varaṇa ke puṣpa caढ़āūṃ॥

tumhare sāmane nṛtya karūṃ nita।
prabhu ghaṇṭā śaṃkha mṛdaṃga bajāūṃ॥

caraṇa dhoya caraṇāmṛta lekara।
kuṭumba sahita baikuṇṭha sidhārūṃ॥

jo kucha rūkhā – sūkhā ghara meṃ।
bhoga lagākara bhojana pāūṃ॥

mana bacana karma se pāpa kiye।
jo parikramā ke sātha bahāūṃ॥

aisī kṛpā karo mujha para।
jama ke dvāre jāne na pāūṃ॥

mādhodāsa kī vinatī yahī hai।
hari dāsana ko dāsa kahāūṃ॥

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सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

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