अनुशासन पर निबंध – Anushasan Par Essay in Hindi

अनुशासन पर निबंध – (Anushasan Par Essay in Hindi) जीवन में अनुशासन का महत्त्व बहुत ही जरुरी है। घर, विद्यालय, दफ्तर, खेल के मैदान तथा युद्ध में भी नियमबद्ध आचरण का पालन किया जाता है। पढ़ें विस्तार से यह निबंध–

प्रस्तावना

‘अनुशासन’ शब्द दो शब्दों के मेल से बना है; अनु और शासन जिसका अर्थ है स्वयं पर शासन करना तथा उस शासन या नियम का जीवन में समय-समय पर पालन करना। जीवन में अनुशासन का बहुत महत्त्व है, इसके बिना जीवन को सुचारू रूप से नहीं जिया जा सकता। विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, दफ्तर, खेल के मैदान तथा युद्ध में भी नियमबद्ध आचरण का पालन किया जाता है। किसी सफलता को प्राप्त करने के लिए लोग पहले नियम बनाते है और धीरे-धीरे प्रत्येक दिन उस नियम का पालन करते है और जो लोग ऐसा करते है वही जीवन में सफलता की चोटी को प्राप्त करते है।

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 जीवन में अनुशासन का महत्त्व

मानव सामाजिक प्राणी है और समाज से अपना लगाव बनाए रखने के लिए उसके द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना आवश्यक मानता है तभी समाज उसे अपना हिस्सा स्वीकार कर पाता है। इसका महत्त्व जीवन के हर एक पहलू से जुड़ा हुआ है। सामाजिक अनुशासन तथा आंतरिक अनुशासन से जीवन जीने की प्रेणना तो मिलती ही है लेकिन किसी प्रभावशाली और सफल व्यक्ति से भी व्यवहार तथा अनुशासन में परिवर्तन करने की प्रेणना मनुष्य को मिलती रहती है। आधुनिक युग में ही नहीं अपितु प्राचीन युग में भी अनुशासन को अत्यधिक महत्त्व दिया जाता था, सूर्योदय से पहले उठना, दाँतों को साफ करना, स्नान करना, सूर्य को जल चढ़ाना, हल्का भोजन करना, पाठशाला में समय से पहुँचना और घर समय से आना, हाथ-मुँह धोकर भोजन करना, मित्रों के साथ खेलना तथा रात को समय से सोना इस प्रकार सभी कार्यों को विद्यार्थी साफ-स्वच्छ तरीके से करते, जिसके कारण उनके लिए सफलता की राह पर चलना आसन हो जाता था। अनुशासन को सफल जीवन का आधार भी कहा जा सकता है क्योंकि इसे मनुष्य स्वयं अपने लिए बनाता तथा निर्धारित करता है और उसका पालन भी वही करता है। अगर हम जीवन के अंतिम समय तक नियमबद्ध आचरण को अपना साथी मानकर उसका पालन करते है तो जीवन की ज़्यादातर कठिनाइयाँ धीरे-धीरे आसान हो जाती हैं।

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 प्रकृति में अनुशासन के अनेक उदाहरण

हमें प्रकृति से सीखना चाहिए क्योंकि प्रकृति अनुशासन का कभी अवज्ञा नहीं  करती तथा हमेशा से नियमबद्ध आचरण में स्वयं को बाँधे रहने के साथ-साथ कभी भी स्वार्थी नहीं होती एवं अपने फल-फूल से पृथ्वी को सुंदर बनाए रहती है, अधिक से अधिक धरा के लोगों को कुछ न कुछ देने की क्षमता रखती है। अनुशासन का पालन कैसे किया जाए? इसका सबसे बेहतर उत्तर या उदाहरण हमारी प्रकृति ही है; जैसे:- सूर्य समय से उदय होता है तथा समय से अस्त होता है, इसी तरह चाँद भी, समुद्र का जल खारा होता है, माता-पिता अपने बच्चों से सदा प्रेम करते है, पुस्तक हमें सदा ज्ञान देते है आदि इसी प्रकार हमें भी अनुशासन के प्रति दृणता को अपनाना चाहिए और सभी समस्याओं का सामना करते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए। कोई भी व्यक्ति अपने माता-पिता तथा सफल व्यक्तियों से अनुशासन के महत्त्व को समझ सकता है, उनके अनुभव से प्राप्त समझ द्वारा अपने जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना आसानी से कर सकता है।

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अनुशासन का पालन करने के तरीके

किसी भी कार्य को सफल बनाने के लिए योजना बनाना आवश्यक है और जब तक उस योजना पर नियमबद्ध तरीके से कार्य नहीं करते तब तक उसमें श्रेष्ठ सफलता प्राप्त करना संभव नहीं हो सकता। मानव को अपने माता-पिता का सदा सम्मान करना चाहिए एवं उनकी बातों को ध्यान से सुनना तथा जीवन में उसका पालन करना चाहिए क्योंकि वही हमारे आदर्श तथा हमारे पहले गुरु होते हैं तथा अनुभवी भी। हम अधिकतर अपना समय व्यर्थ के कार्यों में भी गवा देते है जिसके कारण हमारे महत्त्वपूर्ण कार्य उस समय पर पूरे नहीं हो पाते जिस समय होने चाहिए और कभी-कभी यही हमें हमारी सफलता से दूर कर देता है इसलिए व्यर्थ के कामों से दूरी बनाए रखना चाहिए, ऐसा करने से हम चिंतामुक्त भी रहेंगे तथा हमारा प्रत्येक कार्य सही समय पर पूरा भी होगा। माना कि मस्तिष्क को थोड़ा आराम देने के लिए तथा सुचारू रूप से कार्य करने लिए कभी-कभी खेलना-कूदना आवश्यक होता है पर पूरा समय व्यर्थ के कार्यों में लगा देना हानिकारक सिद्ध हो सकता है। जो मनुष्य बचपन से ही नियमबद्ध आचरण का पालन करने की आदत लगा लेता है तो उसे व्यर्थ के कार्यों से परहेज़ ही रहता है। मनुष्य कुछ बुरी आदतों को भी अपना लेते है; जैसे:- अत्यधिक शराब का सेवन करना, समय पर भोजन न करना, नियमबद्ध तरीक़े से अपने कार्यों को न करना आदि जिसके कारण लोग अपने कार्यों से दूरी बना लेते है। इसके कारण उनके स्वास्थ्य पर भी हानिकारक प्रभाव पड़ता है। जीवन में अनुशासन को बनाए रखने के लिए मानव को अपने कार्य के प्रति पूरी लगन और निष्ठा रखनी चाहिए। अपनी सोच को सकारात्मक रखना भी अनुशासन का एक हिस्सा ही है और आज के युग में ऐसा करना अति आवश्यक महसूस किया गया है क्योंकि आज-कल ज़्यादातर मनुष्य किसी न किसी वहज से अत्यधिक चिंता करते है; जैसे:- दफ्तर में अत्यधिक काम होने पर पहले से ही हार मान लेना कि इतना अधिक काम उनसे कभी नहीं हो पाएगा, किसी विशेष परीक्षा में कभी सफल नहीं हो पाएंगे। इस तरह की नकारात्मक सोच के कारण मनुष्य आंतरिक तथा बाहरी रूप से स्वयं को कमज़ोर समझने लगते है और कभी-कभी नकारात्मक सोच उस पर इतना हावी हो जाता है कि वे हृदय रोग, सर दर्द तथा अवसाद जैसे गंभीर रोग से स्वयं को पीड़ित पाते है। कहा जाता है कि चिंता हमें चिता अर्थात् मृत्यु की ओर ले जाती है इसलिए सकारात्मक सोच रखना मनुष्य के मस्तिष्क के साथ-साथ उनके शरीर के लिए भी लाभदायक माना जाता है।

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 अनुशासन सफलता का आधार

प्रत्येक मनुष्य की अपनी-अपनी ज़िम्मेदारियाँ होती है; वह इन ज़िम्मेदारियों को पूरा करने का प्रयास भी करते है लेकिन मात्र एक या दो बार प्रयास करने से उन ज़िम्मेदारियों को पूरा नहीं किया जा सकता, इसके लिए आवश्यक है जीवन में नियमबद्ध आचरण को लागू करना क्योंकि ज़िम्मेदारियों का अस्तित्व मनुष्य के जीवन में सदा बना रहता है। सही या गलत का फैसला भी हम अनुशासन को ध्यान में रखकर ही करते है तथा जो अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदार, एकनिष्ठ होते है तथा जो मानव ऐसा करते है उनको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता और वह धीरे-धीरे अपनी सफलता की राह स्वयं बना लेते है। नियमबद्ध आचरण का अर्थ लोगों के कार्य पर भी निर्भर करता है; जैसे:- विद्यार्थियों के लिए इसका मतलब स्वयं को पूर्ण रूप से अध्ययन क्षेत्र में केंद्रित करना तथा अपने कार्य को समय के अनुसार पूरा करना है, दफ्तर में काम करने वालो के लिए इसका मतलब सुबह समय से उठना व्यायाम करना; हल्का भोजन करके दफ्तर जाना और वहाँ के कार्यों को ठीक से करना तथा समय से घर लौटना है, इसी प्रकार व्यवसाय के परिवर्तन होते ही अनुशासन में थोड़ा परिवर्तन तो अवश्य आता है लेकिन देखा जाए तो नियमबद्ध आचरण में पूर्ण रूप से बदलाव नहीं किया जा सकता क्योंकि प्रत्येक मनुष्य का जुड़ाव कही न कही किसी न किसी प्रकार की सफलता से ही होता है। अनुशासन तथा सफलता के बीच गहरा संबंध माना जाता है क्योंकि कही न कही ये एक-दूसरे की पूरक प्रतीत होती है अगर अनुशान सफलता का आधार है तो सफल मनुष्य तब तक पूर्ण रूप से सफल नहीं माना जा सकता जब तक वह अपने जीवन में नियमबद्ध आचरण के महत्त्व को नहीं समझता तथा उसे स्वयं पर लागू नहीं करता।

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 आधुनिक युग में अनुशासन के लाभ

आधुनिक भाग-दौड़ के जीवन में अनुशासित व्यक्ति को किसी भी कार्य में सबसे पहले अवसर प्रदान किया जाता है क्योंकि ऐसे व्यक्ति अनुशासनहीन व्यक्ति की तुलना में अपना कार्य अधिक कुशलता तथा अनुशासित तरीके से करते है तथा अपने कार्यों को हमेशा समय से करते है साथ ही उनका व्यक्तित्व लोगों के दिमाग पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ता है। संगठन, रक्षा तथा सेना के कार्यों में अनुशासन को सबसे अधिक महत्त्व दिया जाता है तथा नियमबद्ध आचरण को सर्वोपरि माना जाता है क्योंकि ऐसे क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या छोटी से छोटी चूक भी बहुत बड़ी समस्या का कारण बन सकती है तथा अत्यधिक हानिकारक साबित हो सकती है इसलिए इन क्षेत्रों में नियमों को बड़ी सख़्ती  से लागू किया जाता रहा है तथा पूर्ण रूप से पालन किया जाता है। अनुशासित मानव अपने जीवन में आज्ञा का पालन करता है और स्वयं को नियमबद्ध करके रखता है तथा सभी कार्य नित्य नियम के अनुसार करता है, ऐसे मनुष्य मानसिक तथा शारीरिक दोनों रूप से हमेशा स्वस्थ रहते है क्योंकि अनुशासन एक प्रकार की क्रिया है जिसका पालन प्रकृति भी बेहतर तरीके से करती है। यातायात के साधनों तथा उनके चालकों के लिए भी नियम निर्धारित किए गए है; जैसे:- मोटरबाइक चलाते समय हैलमेट को सिर की सुरक्षा के लिए अनिवार्य किया गया, यातायात के वाहनों के लिए गति-सीमा को निर्धारित किया गया, 40 किमी. प्रति घंटे वाहनों की गति को सड़क पर सही मानदंड माना गया, वाहन में उस्थित सीट बेल्ट को बाँधना तथा रेड लाइट का पालन अवश्य करना इस प्रकार के नियमों का पालन वही मनुष्य करता है जो अनुशासन का महत्त्व समझता हो और जो भी मनुष्य इन नियमों का पालन ईमानदारी तथा सावधानी से करते है, वे स्वयं के साथ-साथ दूसरों को भी सुरक्षित रख सकते है। इससे यह भी सिद्ध होता है कि नियमबद्ध आचरण को अपनाने से या करने से न केवल स्वयं अपितु आस-पास के लोगों का का भी भला होता है इस प्रकार अनुशासन व्यक्ति को और भी अच्छे कार्य करने तथा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है, यह हमारे लिए एक प्रेणना का स्त्रोत भी बनता है।

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 निष्कर्ष

अनुशासनहीनता मनुष्य को आलसी तथा गैर-ज़िम्मेदार बना देती है, यह हमारे आत्मविश्वास के स्तर को कम करने के साथ अनेक समस्याओं में उलझा देती है तथा हमें हमारे मुख्य लक्ष्य से भटकाती है जबकि अनुशासन का नित्य पालन करने वाले   मनुष्य सफलता की  सबसे बड़ी चोटी पर नज़र आते है। यह भी कहा जाता है कि जिस मनुष्य ने स्वयं पर शासन कर लिया वही सफलता के मार्ग को प्राप्त कर सकता है तथा एक सफल व्यक्तित्व के रूप में उभर सकता है अर्थात् सफलता तक तो पहुँचा जा सकता है लेकिन जीवन भर सफल व्यक्तित्व बने रहने के लिए सबसे बेहतर तथा पहला साधन अनुशासन को ही माना जा सकता है। हम कह सकते है कि अनुशासन सफलता का वह आधार है जिसके सहारे मनुष्य बिना लक्ष्य से भटके अपने सफल व्यक्तित्व का निर्माण कर पाता है और समाज, देश, विदेश तथा विश्व में एक सम्मानित व्यक्ति के रूप में अपनी पहचान बनाता है तथा साथ में अपने देश का भी नाम रोशन करता है। यही कारण है कि आधुनिक युग में अनुशासन को अधिक महत्त्व दिया जा रहा है।

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सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

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