दीपावली पर निबंध हिंदी में – Essay on Diwali in Hindi

दीपावली पर निबंध हिंदी में पढ़ें जो सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है। दीपावली के पर्व को दिवाली अथवा दीवाली आदि अनेक नामों से पुकारा जाता है। जिन छात्र-छात्राओं को दीपावली पर निबंध चाहिए हिंदी में, वे बिल्कुल सही जगह आए हैं। यह निबन्ध तनसुखराम गुप्ता जी द्वारा लिखित पुस्तक “401 हिन्दी निबन्ध” से लिया गया है। पढ़ें दीपावली पर निबंध हिंदी में (Essay on Diwali in Hindi)–

उल्लास और प्रकाश का उत्सव है दिवाली

दीपावली प्रकाश का अन्यतम पर्व है। “तमसो मा ज्योतिर्गमय” का महान उत्सव है। मन को आलोकित करने का त्यौहार है। धन, सम्पत्ति, सौभाग्य एवं सत्त्वगुण की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी जी के पूजन का दिवस है। जन-मन को प्रसन्नता, हर्षोल्लास एवं श्री-सम्पन्नता की कामना का महापर्व है। अनेक महान तथा पूज्य पुरुषों के जीवन से सम्बद्ध प्रेरणाप्रद घटनाओं का स्मृति पर्व है।

दीपावली पर निबंध में सर्वप्रथम यह जानना आवश्यक है कि इस पर्व को कब मनाते हैं। वस्तुतः कार्तिक मास की अमावस्या दीवाली का शुभ दिन है। अमावस्या की काली रात को हिन्दू जनता, घर-घर में दीपकों की पंक्ति जलाकर उसे पूर्णिमा से अधिक उजियाला बना देती है। यह उजियाला न केवल वातावरण को उज्ज्वल करता है, अपितु मन के अंधकार को हटाकर उसे ज्योतिर्मय करने का संदेश भी देता है।

दीपावली है पर्वों का समूह

दीपावली एक दिवसीय पर्व नहीं, यह पर्व-समूह है जो कार्तिक कृष्णा त्रयोदशी से शुक्ल पक्ष की दूज तक बड़े हर्षोल्लास से समारोहपूर्वक सम्पन्न होता है। ये उत्सव हैं धन-त्रयोदशी, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) तथा भ्रातृ-द्वितीया (भैयादूज)।

दीपावली आदिकाल में आर्यों की आर्थिक सम्पन्नता एवं हर्षोल्लास का पर्व रहा होगा। आर्थिक सम्पन्नता का मापदंड था कृषि उपज। फसल के घर आने को स्वर्ण-भरण माना गया होगा। वर्ष भर के कड़े श्रम के बाद घर आई ‘अन्न-धन’ रूपी लक्ष्मी मैया का स्वागत करने के लिए घर-आँगन लीप-पोत कर साफ-सुथरे किए जाते रहे होंगे और अभावों के कूड़े-करकट को झाड़-बुहार कर एक किनारे फेंक दिया जाता रहा होगा। प्रत्येक घर में नए कपास की बाती से, नए तिल के तेल में दीप संजोया जाता रहा होगा और नए वर्ष की अगवानी की जाती रही होगी।

इसीलिए दीवाली से एक मास पूर्व घर की सफाई, लिपाई-पुताई तथा दीप-प्रज्वलन की परम्परा प्राचीन काल की देन है।

दीपावली की अमावस्या का महत्व

समुद्र-मंथन से प्राप्त चौदह रत्नों में लक्ष्मी माता भी एक रत्न थीं। इस लक्ष्मी रत्न का प्रादुर्भाव कार्तिक की अमावस्या को हुआ था। उस दिन से कार्तिक को अमावस्या लक्ष्मी-पूजन का पर्व बना। इस अवसर पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी के पूजन का भी विधान है।

लक्ष्मी जी धन-सम्पत्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं और गणेश जी विघ्ननाशक तथा मंगल के देवता हैं। लक्ष्मी-गणेश के समन्वित पूजन का अर्थ है–धन का मंगलमय संचयन और उसका धर्मसम्मत उपभोग। अन्यथा धन-सम्पत्ति पाप एवं जीवन में विघ्नों की उपस्थिति का कारण बन जाएगी।

लक्ष्मी श्रम-साध्य हैं। कृषि संस्कृति का मूल-मंत्र ही श्रम है। धर्म पर आधारित लक्ष्मी का पूजन श्रम-बिन्दुओं से होता है। गणपति जी इस श्रम को मंगलकारी बनाते हैं। इसलिए धर्म पर आधारित अर्थ (लक्ष्मी) कमलासना है और अधर्म पर आधारित लक्ष्मी उलूकवाहिनी। अतः लक्ष्मी के साथ गणपति का पूजन होता है।

एक किंवदन्ती यह भी है कि भारतीय-संस्कृति के आदर्श पुरुष श्रीराम लंकेश्वर रावण पर विजय प्राप्त कर भगवती सीता सहित जब अयोध्या लौटे, तो अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत के लिए घरों को सजाया और रात्रि को दीपमालिका की। प्रभु श्रीराम के अयोध्या लौटने के प्रसंग को ‘दीपावली’ से सम्बद्ध कर दिया गया है। यद्यपि यह जनश्रुनि मात्र ही है, तथ्य नहीं।

महापुरुषों के जीवन से संबंधित घटनाएँ

दीपावली पर निबंध में यह भी जानना चाहिए कि किन-किन महापुरुषों से इस पर्व का संबंध है। दीपावली के पावन दिन से अन्य अनेक महापुरुषों के जीवन की घटनाओं का भी सम्बन्ध है। महाराज युधिष्ठिर का राजसूय-यज्ञ इसी दिन सम्पन्न हुआ था।

राजा विक्रमादित्य आज के ही दिन सिंहासन पर बैठे थे। जैन धर्म के अन्तिम तीर्थंकर महावीर स्वामी, आर्य समाज के प्रवर्तक स्वामी दयानन्द सरस्वती तथा सर्वोदयी नेता आचार्य विनोबा भावे का स्वर्गारोहण दिवस भी है। वेदान्त शास्त्र के प्रसिद्ध विद्वान स्वामी रामतीर्थ का जन्म, ज्ञान-प्राप्ति तथा निर्वाण, तीनों इसी दिन हुए थे। सिखों के छठे गुरु हरगोविन्द जी ने इसी दिन कारावास से मुक्ति पाई थी।

भले ही ये घटनाएँ कार्तिक अमावस्या को हुई थीं, पर ‘दीपावली’ का उत्सव तो समाज हजारों वर्षों से मनाता आ रहा है। अतः इस उत्सव से उनका कोई प्रत्यक्ष सम्बन्ध नहीं।

दीपावली का वैज्ञानिक महत्त्व भी है। दीपावली से पूर्व वर्षा ऋतु समाप्त हो जाती है, किन्तु घरों में मच्छरों, खटमलों, पिस्सुओं और अन्यान्य विषैले कीटाणुओं की भरमार छोड़ जाती है। मलेरिया व टाइफाइड के फलने-फूलने के दिन होते हैं। दूसरे, वर्षभर की गन्दगी से घर की अस्वच्छता पराकाष्ठा पर होती है। अतः दीपावली से महीने-भर पहले ही गरीब और अमीर, सभी अपनी-अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार घरों को सफाई, लिपाई-पुताई और सजावट करते हैं। इससे घर की गन्दगी दूर हो जाती है। नीले थोथे के मिश्रण से की गई सफेदी से मच्छर मर जाते हैं। सरसों के तेल के दीपक जलाने से रोगादि के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। सरसों के तेल का धुआँ (काजल) आँखों के लिए अत्यन्त लाभप्रद है।

घरों की सजावट व खरीदारी का दिन

दीपावली के दिन घरों, दुकानों, मंडियों तथा बाजारों को खूब सजाया जाता है। रात्रि को प्रज्वलित किये जाने वाले नन्‍हें दीपों के प्रकाश से अमावस का गहन तम नष्ट हो जाता है। विद्युत के प्रकाश से सर्वत्र चकाचौंध भर जाती है। पुष्पमालाओं, पन्ने-पत्तियों की झिलमिल लड़ियों, कागज की रंगीन-अद्भुत लहरियों तथा कलात्मक झंडियों से यह शोभा द्विगुणित हो जाती है।

रात्रि के प्रथम प्रहर से अर्धरात्रि तक आतिशबाजी का दौर इस पर्व के उल्लास-उत्साह तथा परम-हर्ष को प्रकट करता है। आतिशबाजी की अग्नि से विभिन्‍न प्रकार की रंग-बिरंगी आकर्षक झड़ियाँ हृदय को विभोर कर देती हैं। बच्चों के हाथों से जलती फुलझड़ियाँ, पटाखों की लड़ियों की पट-पट को कर्ण-बेधती आवाज, अनार और बमों से निकलती स्वर्णिम चिंगारियाँ, गगन को छूती और गगन में फूटती हवाइयों की विचित्र अग्नि-रश्मियाँ दर्शकों के मन में अद्भुत उत्साह, प्रेरणा और खुशियाँ भर देती हैं।

दीपावली खरीददारी की उमंग का दिन है। मिट्टी के खिलौनों तथा दीये, मोमबत्तियाँ, तस्वीरें-कलेण्डर, दीपावली-शुभकामनाएँ और पूजा-सज्जा के लिए उपकरण के सामान, मिठाई, सूखे-मेवे तथा फल, पुष्प, पुष्पममालाओं, आतिशबाजी के समान आदि की दुकानों पर अपार भीड़ होती है। ग्राहक जितने अधीर हैं, दुकानदार भी विद्युत यन्त्र की भाँति उतनी ही त्वरा से विक्रय वस्तु देने को तत्पर हैं।

दीपावली पर निबंध का उपसंहार करते हुए कह सकते हैं कि दीपावली पारिवारिक-मंगल-कामना के विस्तार का पर्व है। इस दिन बंधु-बांधवों तथा मित्रों को बधाई देना तथा उपहार भेजना मंगल-कामना के विस्तार का प्रतीक और सुसंस्कृत रूप है।

दीपावली पर निबंध 150 शब्द में

कई छात्र-छात्राओं को दीपावली पर निबंध 150 शब्द में ही चाहिए होता है। उनके लिए यह संक्षिप्त निबंध 150 शब्दों में प्रस्तुत है–

दीपावली को प्रशाश का पर्व कहता उचित ही है। काले अंधकार पर उज्जवल प्रकाश की विजय का महापर्व प्रतिवर्ष कार्तिक मास की अमावस्या के दिन इतनी धूम-धाम से मनाया जाता है कि संभवतः होली को छोड़कर और कोई पर्व इतने उल्लास के साथ महीं मनाया जाता। दिवाली भारत का बहुत प्राचीन त्यौहार है। वैसे तो इस पर्व का सम्बन्ध भगवान राम जी के चौदह वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटने के साथ जोड़ दिया गया है, किन्तु यह त्योहार इस देश में उससे भी बहुत पहले से मनाया जाता रहा है।

पहला कारण तो यह है कि भारत चिरकाल से कृषि प्रधान देश रहा है। इसीलिए यहाँ के दोनों बड़े-बड़े त्योहार, होली और दिवाली फसल के तैयार होने के समय मनाएं जाते हैं। दीपावली मनाए जाने का दूसरा कारण स्वास्थ्य के नियमों से संबद्ध है। बरसात के महीनों में मकान सील जाते हैं। दीवाली से वह समस्या समाप्त हो जाती है।

दीपावली पर निबंध 200 शब्दों में

जिन विद्यार्थियों को दीपावली पर निबंध 200 शब्दों में चाहिए, उनके लिए निम्नलिखित निबंध उपयोगी सिद्ध होगा–

दीवाली प्रकाश को समर्पित पर्व है। यह त्यौहार अन्धकार का नाश कर प्रकाश की ओर जाने की घोषणा करता है। काले अंधकार पर उज्जवल प्रकाश की विजय का महापर्व प्रतिवर्ष कार्तिक मास की अमावस्या के दिन बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है। दीपावली एक दिवसीय पर्व नहीं, यह पर्व-समूह है जो कार्तिक कृष्णा त्रयोदशी से शुक्ल पक्ष की दूज तक बड़े हर्षोल्लास से समारोहपूर्वक सम्पन्न होता है। ये उत्सव हैं धन-त्रयोदशी, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा तथा भैयादूज।

अमावस्या की रात को हिन्दू जनता, घर-घर में दीपकों की पंक्ति जलाकर उसे पूर्णिमा से अधिक उजियाला बना देती है। यह उजियाला न केवल वातावरण को उज्ज्वल करता है, अपितु मन के अंधकार को हटाकर उसे ज्योतिर्मय करता है। रात्रि के प्रथम प्रहर से अर्धरात्रि तक आतिशबाजी का दौर इस पर्व के उल्लास-उत्साह तथा परम-हर्ष को प्रकट करता है।

इस दिन गणेश-लक्ष्मी की पूजा का विधान है। लक्ष्मी जी धन-सम्पत्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं और गणेश जी विघ्ननाशक तथा मंगल के देवता हैं। लक्ष्मी-गणेश के समन्वित पूजन का अर्थ है–धन का मंगलमय संचयन और उसका धर्मसम्मत उपभोग।

दीपावली पारिवारिक-मंगल-कामना के विस्तार का पर्व है। इस दिन बंधु-बांधवों तथा मित्रों को बधाई देना तथा उपहार भेजना मंगल-कामना के विस्तार का प्रतीक और सुसंस्कृत रूप है।

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सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

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