सौन्दर्य और स्वास्थ्य–हैं दोनों ज़रूरी

Importance of Beauty & Health in Hindi

प्रस्तुत लेख “सौन्दर्य और स्वास्थ्य–हैं दोनों ज़रूरी” श्री सुदर्शन की ज्ञानवर्धक किताब “प्रकृत: स्वास्थ्य और सौन्दर्य” का पहला अध्याय है। इसमें वे सेहत और सुन्दरता दोनों की आवश्यकता और दोनों के अन्योन्याश्रय पर प्रकाश डाल रहे हैं।

जो नारी सुन्दर है, मगर स्वास्थ्य ठीक न रहने से मुरझाई-सी रहने लगती है। उसका स्वास्थ्य और भी क्षीण हो जाएगा! स्वस्थ न रहने के कारण हाथ, पाव, शरीर ठीक से काम नहीं कर रहे। वह उदास रहने लगेगी। ठीक से खा नहीं सकेगी। ठीक से पहन नहीं सकेगी। अपने सौंदर्य का ध्यान रखना उसके बस मे नहीं रहेगा। उसकी सुन्दरता जाती रहेगी। अपनी सुन्दरता को न संभाल सकने का उसे भी दुःख होगा। वह अपने परिवार में, अपने पति से, सखी-सहेलियों से कटने लगेगी। उसे इससे बहुत बड़ा धक्का लगेगा। ग्लानि होने लगेगी। वह उपेक्षित महसूस करेगी। अतः उसका मन जीने को भी नहीं करेगा। ऐसी सुन्दरता का क्या लाभ जो संभाली न जा सके।

जो नारी सुन्दर है। स्वस्थ है। अपनी देखभाल कर सकती है। सुन्दरता को सभाल-संवार सकती है, ऐसी नारी के क्या कहने। वह बहुत खुशकिस्मत है। भाग्यशाली है। बधाई की पात्र है।

जो नारी सुन्दर नहीं, मगर स्वस्थ है। शरीर अच्छा है। मजबूत है। कुछ करने की शक्ति है। चाह है। अपने व्यक्तित्व में सुधार लाने की क्षमता रखती है, ऐसी नारी सुन्दर न होते हुए भी सुन्दर हो सकती है। वह अच्छा खा सकेगी। अच्छा पहन सकेगी। अपने शरीर को, अपने रंग-रूप को निखार कर सुन्दर बन सकेगी। उसके अन्दर कभी हीन भावना नहीं आएगी। ऐसी नारी कभी उपेक्षित नहीं हो सकती। अपना ध्यान रख, चेहरे और पहनावे को सुधार कर, मेकअप कर, अपनी जगह बना लेगी।

वह समय गया जब नारी घर-आँगन में बनी रहती थी। किसी से मिलती न थी। बात तक न करती थी। पहचानती भी न थी। चेहरा अपने घूंघट में छिपाए रखती थी। सारा दिन घर के कामों में जुटी रहती थी। अभी सब लोग सो रहे होते थे वह हिम्मत करके उठ जाया करती। शरीर माने या न माने, बिस्तर छोड़ना ही पड़ता। जुट जाती कामों में। जो मिला वह खा लिया। जो ला दिया, उसे पहन लिया। रात को जब सब सो जाते तो उसे सोने का अवसर मिलता। यही उसकी नियति थी।

ऐसे में भी पति की हर ज़रूरत पूरी करना, उसकी शारीरिक आवश्यकता के सामने अपने को समर्पण करना, उसकी इच्छानुसार शरीर का सत्यानाश करवा लेना तथा बच्चे पैदा करते जाना ही उसका काम था। उसकी अपनी कोई इच्छा न होती। सोच न होती। चाह न होती। होती भी तो दबी रहती। कोई सुनता नहीं। कोई सुनवाई नहीं करता।

यही तो था उसका जीवन! वह अबला कहलाती। अबला कहलाते-कहलाते अबला ही बनकर रह जाती। सदा ताड़न की अधिकारी होती। जैसा व्यवहार पशु से होता, या फिर ढोल को पीट-पीटकर काम लिया जाता, वैसी गति उसकी होती। उसे ज़बान खोलने की हक न होता। जो कहा जाता उसे सुनना होता। मानना होता। झुकना पड़ता। कितना दुर्भाग्यपूर्ण था वह समय, रोंगटे खड़े करने वाला। मगर आज वह चारदीवारी में रहने वाली अथवा घूंघट में छिपी रहने वाली चीज नहीं। वह आदमी के समान है। उसके कन्धे-से-कन्धा मिलाकर चल रही है। हर प्रकार से बराबर है। कहीं-कहीं आदमी से आगे भी निकल गई है। वह चांद तक पहुँचने वालों में एक है। हिमालय पर्वत की सबसे ऊँची चोटी एवरेस्ट तक पर पहुंच चुकी है। वह राष्ट्रपति, राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमन्त्री, सेना में, पुलिस में, न्यायपालिका तक सब जगह अपनी पैठ बना चुकी है तथा सफल भी हुई है।

ऐसी नारी को, जो आज की है, आधुनिक युग की है, उसे सुंदर तथा स्वस्थ भी होना चाहिए। इस पुस्तक का उद्देश्य भी यही है। यदि वह सुन्दर है तो स्वस्थ कैसे रहे! यदि वह स्वस्थ है तो सुन्दर कैसे दिखे! यदि वह सुन्दर भी है, स्वस्थ भी है तो इन दोनों की संभाल कैसे करे! इसमें जरूरी तथा आसान बातों का जिक्र कर, नारी के गौरव को बढ़ाना है। नारी शोडषी भी हो सकती है। युवती हो सकती है। थोड़ी ज्यादा आयु की हो सकती है। ढलती उम्र की भी हो सकती है। सबको सुन्दर बनना है, दिखना है तथा अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना है। यही ध्येय है इस पुस्तक का। इसका अध्ययन-मनन करें। इसके अनुसार चलें। इससे आप एक सफल गृहिणी तथा सम्मानजनक नारी कहलाएंगी।

एलोपैथी की दवाइयों की भरमार है। तेज-से-तेज दवाइयां उपलब्ध हैं। गोली अन्दर जाते ही, इंजेक्शन लगते ही आप ठीक हो सकती हैं। मगर इनके साइड इफैक्ट्स बहुत होते हैं। जो शरीर पर दूरगामी प्रभाव डालते हैं। शरीर ठीक नहीं होता बल्कि और भी रोगयुक्त हो जाता है। एक छोटी बीमारी ठीक होती है तो बड़ी लग जाती है। और फिर वह बीमारी लाइलाज ही होती है।

सेहत और सुन्दरता जानकारी के माध्यम से घर में प्राप्त होने वाले मसाले, फल, सब्जियों से संभव है। स्वास्थ्य सुधार की संभावना है। रोगमुक्त रहने के, सुन्दर बने रहने के अनेक साधन हैं। सुन्दर दिखने की गुंजाइश समझें और अपने जीवन को सफल बनाएं। यह पुस्तक आपको पढ़नी चाहिए। बार-बार पढ़ें तथा अपने जीवन की सार्थक बनाए वाले पदार्थों की जानकारी पाकर लाभ उठाएँ।

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