पार्वती जी की आरती – Parvati Ji Ki Aarti

पार्वती जी की आरती का गायन हृदय को शुद्ध करने वाला और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला है। माँ अपने भक्तों के सारे कष्ट दूर करती हैं और उन्हें मनोवांछित परिणाम प्रदान करती हैं। पूजा के अन्त में पार्वती जी की आरती (Parvati Ji Ki Aarti) को गाने का विधान है। ऐसा करने से पूजन के दौरान हुई सभी गलतियों का परिमार्जन हो जाता है। पढ़ें यह आरती–

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता,
ब्रह्म सनातन देवी शुभफल की दाता।

अरिकुल पद्म विनाशिनी जय सेवा त्राता,
जगजीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता॥

सिंह का बाहन साजे कुण्डल हैं साथा,
देवबंधु जस गावत नृत्य करते ता था।

सतयुग रूप शील अतिसुन्दर नाम सती कहलाता,
हेमांचल घर जन्मी सखियन संग राता।

शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्थाता,
सहस्त्र भुज तनु धरिके चक्र लियो हाथा।

सृष्टिरूप तुही है जननी शिवसंग रंगराता,
नन्दी भृंगी बीन लही है हाथन मदमाता॥

देवन अरज करत तव चित को लाता,
गावत दे दे ताली मन में रंगराता।

श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता,
सदा सुखी नित रहता सुख सम्पत्ति पाता॥

सभी देवियाँ माता पार्वती के ही भिन्न-भिन्न रूप हैं। माता अनंत आयामों से पूर्ण हैं और हर देवी उनके एक आयाम की अभिव्यक्ति है। इस दृष्टि से यह आरती गाना सभी देवियों की आराधना करने के समान है।

सन्दीप शाह

सन्दीप शाह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। वे तकनीक के माध्यम से हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर कार्यरत हैं। बचपन से ही जिज्ञासु प्रकृति के रहे सन्दीप तकनीक के नए आयामों को समझने और उनके व्यावहारिक उपयोग को लेकर सदैव उत्सुक रहते हैं। हिंदीपथ के साथ जुड़कर वे तकनीक के माध्यम से हिंदी की उत्तम सामग्री को लोगों तक पहुँचाने के काम में लगे हुए हैं। संदीप का मानना है कि नए माध्यम ही हमें अपनी विरासत के प्रसार में सहायता पहुँचा सकते हैं।

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